Thursday, May 6, 2010

विश्व पर्यावरण दिवस


विश्व पर्यावरण दिवस ५ जून को मनाया जाता है। प्रदूषण न केवल राष्ट्रीय अपितु अंतर राष्ट्रीय भयानक समस्या है।
मनुष्य के आस पास जो वायुमंडल है वह पर्यावरण कहलाता है । पर्यावरण का विश्व जगत के स्वास्थ्य एवं कार्य कुशलता से गहरा सम्बन्ध है। पर्यावरण को पावन बनाए रखने में प्रकृति का विशेष महत्व है । प्रकृति का संतुलन बिगड़ा नहीं कि पर्यावरण दूषित हुआ नहीं । पर्यावरण के दूषित होते ही जीव जगत रोग्रस्त हो जाता है ।

वन महोत्सव


भारत में कई त्योहार वृक्षों से जुड़े है। उनमे से एक है वन महोत्सव। इस महोत्सव का आरंभ के एम मुंशी ने किया। इस महोत्सव को १९५० से मनाया जा रहा है । जुलाई के महीने में वृक्षारोपण द्वारा वन महोत्सव का त्योहर मनाया जाता है । वन महोत्सव का मुख्य उद्देश्य लोगों में प्रकृति के प्रति प्रेम और पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना है ।

Tuesday, April 20, 2010

क्या बिना वृक्षों के प्रकृति का श्रृंगार संभव है .......



प्रकृति परमात्मा की अनुपम कृति है । प्रकृति का पल -पल परिवर्तित रूप उल्लासमय है । हृदयाकर्षक है, वह मुस्काती रहती है, सर्वस्व लुटाकर भी हंसती रहती है। प्रकृति के इस सोंदर्य को वृक्ष चार चाँद लगाते है, फूलों की मनोहारी सुन्दरता से मन आत्मविभोर हो जाता है, उसके सोंदर्य से प्रकृति एक दुल्हन के सामान प्रतीत होती है तो क्या बिना वृक्षों के प्रकृति रूपी सुन्दरी का श्रृंगार संभव है। बिना गहनों के क्या दुल्हन मन को लुभा सकती है। वृक्ष प्रकृति का महत्वपूर्ण अंग है । वृक्षों की कटाई प्रकृति से उसका श्रृंगार छीन लेगी। न श्रृंगार, न उल्लास, फिर कौन जाना चाहेगा प्रकृति की गोद मे ?